भारत में बलात्कार पीड़िता की स्थिति और भारतीय कानून के अंतर्गत उपलब्ध उपाय(BNS 2023, BNSS 2023 एवं भारतीय संविधान के अनुसार)


भारत में बलात्कार पीड़िता की स्थिति और भारतीय कानून के अंतर्गत उपलब्ध उपाय

(BNS 2023, BNSS 2023 एवं भारतीय संविधान के अनुसार)


प्रस्तावना

भारत में बलात्कार एक अत्यंत गंभीर अपराध है, जो न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक, सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। भारतीय विधि व्यवस्था में बलात्कार पीड़िता को केवल एक शिकायतकर्ता नहीं, बल्कि अधिकारों से युक्त पीड़िता (Survivor) के रूप में देखा जाता है।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के लागू होने के बाद पीड़िता-केंद्रित सुरक्षा और राहत प्रावधानों को और अधिक मजबूत किया गया है।

यह लेख केवल शैक्षणिक एवं कानूनी जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है।


भारतीय संविधान के अंतर्गत पीड़िता के अधिकार

बलात्कार पीड़िता को निम्नलिखित संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हैं:

  • अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार
  • अनुच्छेद 15(3) – महिलाओं के लिए विशेष संरक्षण
  • अनुच्छेद 21 – जीवन, गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता का अधिकार

सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक निर्णयों में माना है कि बलात्कार अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन है


भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के अंतर्गत बलात्कार

BNS, 2023 के अंतर्गत बलात्कार को एक घृणित और गंभीर अपराध माना गया है।

मुख्य बिंदु

  • बलात्कार महिला की गरिमा के विरुद्ध अपराध है
  • सहमति स्पष्ट, स्वैच्छिक और बिना दबाव की होनी चाहिए
  • मौन या प्रतिरोध न करना सहमति नहीं माना जाएगा
  • गंभीर मामलों में कठोर दंड का प्रावधान है

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के अंतर्गत पीड़िता के अधिकार

1. निःशुल्क चिकित्सा उपचार

  • किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल द्वारा उपचार से इंकार नहीं किया जा सकता
  • मेडिकल परीक्षण एवं इलाज पूर्णतः निःशुल्क होगा
  • इंकार करना दंडनीय अपराध है

2. FIR दर्ज करने का अधिकार

  • FIR तुरंत दर्ज की जानी चाहिए
  • Zero FIR किसी भी थाने में दर्ज की जा सकती है
  • यथासंभव महिला पुलिस अधिकारी द्वारा बयान दर्ज किया जाना चाहिए

3. बयान दर्ज करने की प्रक्रिया

  • पीड़िता की पसंद के स्थान पर बयान
  • बंद कमरे (In-Camera) में कार्यवाही
  • पहचान की गोपनीयता अनिवार्य

मुआवज़ा एवं आर्थिक सहायता

पीड़ित प्रतिकर योजना

पीड़िता को निम्न योजनाओं के अंतर्गत मुआवज़ा मिल सकता है:

  • राज्य पीड़ित प्रतिकर योजना
  • निर्भया फंड
  • अंतरिम प्रतिकर (Investigation के दौरान)

मुआवज़े में शामिल हैं:

  • चिकित्सा खर्च
  • मनोवैज्ञानिक परामर्श
  • पुनर्वास
  • आजीविका सहायता

निजता एवं विशेष संरक्षण

  • पीड़िता की पहचान प्रकाशित करना अपराध है
  • मीडिया पर प्रतिबंध
  • संवेदनशील न्यायिक व्यवहार अनिवार्य

न्यायालय की भूमिका

न्यायालय यह सुनिश्चित करते हैं:

  • शीघ्र सुनवाई
  • ट्रायल के दौरान उत्पीड़न से सुरक्षा
  • सज़ा निर्धारण में पीड़िता के प्रभाव पर विचार

सरकारी सहायता सेवाएँ

  • वन स्टॉप सेंटर (OSC)
  • निःशुल्क कानूनी सहायता
  • काउंसलिंग एवं पुनर्वास सेवाएँ

महत्वपूर्ण कानूनी जागरूकता

बलात्कार पीड़िता एक अधिकारधारी नागरिक है।
राज्य का कर्तव्य है कि वह उसे सुरक्षा, सहायता और न्याय प्रदान करे।


अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है।
यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह नहीं है।
कानूनी समाधान के लिए योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है।

 पीड़िता को मिलने वाले सरकारी मुआवज़े


✔️ भारतीय न्याय संहिता ओर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत प्रावधान=

मुख्य धारा – बलात्कार

धारा 63 – बलात्कार (Rape)

यह धारा वही भूमिका निभाती है जो पहले IPC की धारा 375 करती थी।

धारा 63 तब लागू होती है जब:

महिला की सहमति के बिना

जबरदस्ती / डर / धोखे से

नाबालिग के साथ

बेहोशी / मानसिक असमर्थता की स्थिति में

वैवाहिक स्थिति की गलत जानकारी देकर

यौन संबंध बनाया गया हो।


⚖️ सजा से संबंधित धाराएँ

धारा 64 – बलात्कार की सजा

न्यूनतम 10 वर्ष की सश्रम कारावास

आजीवन कारावास तक

जुर्माना (पीड़िता को मुआवजा)

धारा 65 – नाबालिग से बलात्कार

यदि पीड़िता:

16 वर्ष से कम →

👉 20 वर्ष से आजीवन कारावास

12 वर्ष से कम →

👉 आजीवन कारावास या मृत्युदंड

🚨 विशेष/कठोर परिस्थितियाँ

धारा 66 – गंभीर परिस्थितियों में बलात्कार

जब आरोपी हो:

पुलिस अधिकारी

सरकारी कर्मचारी

जेल/रिमांड में कस्टडी वाला व्यक्ति

रिश्तेदार / अभिभावक / शिक्षक

👉 सजा: आजीवन कारावास या उससे अधिक

🔁 बार-बार अपराध

धारा 67 – बार-बार बलात्कार करने वाला अपराधी

👉 आजीवन कारावास या मृत्युदंड

🧠 महत्वपूर्ण बिंदु (Exam + Practical दोनों के लिए)

वैवाहिक बलात्कार:

BNS में पत्नी 18 वर्ष से कम हो तो अपराध माना गया है

Consent (सहमति) को बहुत सख्ती से परिभाषित किया गया है

केवल शारीरिक चोट जरूरी नहीं, मानसिक दबाव भी पर्याप्त है।


👸 सारांश।         तालिका।      

साधारण बलात्कार।        धारा 63

सजा।                 धारा 64

नाबालिक से।        धारा 65

पुलिस या अथॉरिटी द्वारा।       धारा 66

Repeat offender.        Section 67




लेखक: Akash Purohit
भूमिका: Legal Researcher
अंतिम अपडेट: 17 जनवरी 2026



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