FIR से चार्जशीट दाखिल करने तक की प्रक्रिया (BNSS के तहत)
BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 का स्थान लेती है और 1 जुलाई 2024 से लागू हुई है। यहां FIR से लेकर चार्जशीट दाखिल करने तक की प्रक्रिया का सरल चरण-दर-चरण विवरण है:
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📌 चरण 1: प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज होना
· पीड़ित/सूचनादाता/गवाह थाने में FIR दर्ज कराता है।
· BNSS धारा 173: FIR दर्ज करना अनिवार्य है यदि संज्ञेय अपराध (5 वर्ष या अधिक सजा वाला) का पता चलता है।
· e-FIR: अब ऑनलाइन/डिजिटल रूप से भी FIR दर्ज की जा सकती है।
· तुरंत कार्रवाई: एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस जांच शुरू कर देती है।
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📌 चरण 2: प्रारंभिक जांच
· पुलिस मौके का निरीक्षण करती है।
· BNSS धारा 176: अब फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी गंभीर अपराधों (7 वर्ष या अधिक सजा) के स्थल का वैज्ञानिक निरीक्षण करेगी।
· बयान दर्ज करना: पीड़ित, गवाहों और संदिग्धों के बयान दर्ज किए जाते हैं।
· सबूत जुटाना: डॉक्यूमेंट, डिजिटल सबूत, फोरेंसिक सैंपल आदि जुटाए जाते हैं।
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📌 चरण 3: गिरफ्तारी और हिरासत
· BNSS धारा 35: अब डिजिटल रूप से भी गिरफ्तारी का संचार किया जा सकता है।
· हिरासत अवधि:
· सामान्य मामलों में 15 दिन (न्यायिक हिरासत सहित)।
· गंभीर अपराधों में 90 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।
· मरीज हिरासत: BNSS में महिलाओं और 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए विशेष प्रावधान।
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📌 चरण 4: जांच पूरी करना
· समय सीमा:
· BNSS धारा 193: सामान्य मामलों में 90 दिन के अंदर जांच पूरी करनी होगी।
· गंभीर मामलों में (10+ वर्ष सजा) अधिकतम 180 दिन, और विशेष परिस्थितियों में स्थानीय न्यायालय की अनुमति से और अधिक।
· जांच अधिकारी: BNSS में डीएसपी स्तर के अधिकारी को गंभीर मामलों की जांच करनी होगी।
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📌 चरण 5: चार्जशीट (अंतिम अभियोग पत्र) दाखिल करना
· जांच पूरी होने पर पुलिस न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करती है।
· चार्जशीट में शामिल:
1. आरोपी का विवरण
2. आरोपों का विवरण
3. गवाहों की सूची
4. दस्तावेजी सबूत
5. फोरेंसिक रिपोर्ट
6. आरोपी का पूर्व इतिहास (यदि कोई हो)
· BNSS में नया: अब डिजिटल रूप से भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
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📌 चरण 6: चार्जशीट दाखिल होने के बाद
· न्यायालय चार्जशीट की प्रति आरोपी को देता है।
· फ्रेमिंग ऑफ चार्ज्स: न्यायालय आरोपी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय करता है।
· दोषस्वीकृति या खंडन: आरोपी अपना पक्ष रखता है।
· मुकदमे की प्रक्रिया शुरू होती है।
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📌 BNSS की प्रमुख नई विशेषताएं:
1. समयबद्ध जांच: 90/180 दिनों की समयसीमा।
2. डिजिटल प्रक्रियाएं: ई-एफआईआर, डिजिटल चार्जशीट, ई-सबूत।
3. वैज्ञानिक जांच पर जोर: फोरेंसिक टीमों का अनिवार्य उपयोग।
4. पारदर्शिता: पीड़ित को जांच की प्रगति से अवगत कराना।
5. ZERO FIR: किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकते हैं, भले अपराध वहां हुआ हो या नहीं।
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📊 प्रक्रिया का फ्लोचार्ट:
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FIR दर्ज → प्रारंभिक जांच → गिरफ्तारी (यदि आवश्यक) → विस्तृत जांच →
सबूत एकत्र → फोरेंसिक रिपोर्ट → जांच पूर्ण → P/F रिपोर्ट →
चार्जशीट तैयार → न्यायालय में चार्जशीट दाखिल → न्यायिक प्रक्रिया शुरू
```
⚠️ महत्वपूर्ण: यदि जांच में कोई सबूत न मिले, तो पुलिस फाइनल रिपोर्ट (अंतिम रिपोर्ट) दाखिल कर सकती है, जिसे न्यायालय मंजूर या खारिज कर सकता है।
नोट: यह सामान्य प्रक्रिया है। विशिष्ट मामलों में प्रक्रिया भिन्न हो सकती है। कानूनी सलाह के लिए हमेशा वकील से परामर्श लें।
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